छत्तीसगढ़ राज्य में बांस मिशन वर्ष 2006-07 से स्थापित है। इसका क्रियान्वयन वन विभाग द्वारा किया जा रहा है। राज्य स्तरीय बांस विकास प्राधिकरण के क्रियान्वयन हेतु मुख्य वन संरक्षक बांस मिशन को मिशन निदेशक नियुक्त किया गया है। प्रदेश के वन क्षेत्रो में बांस रोपण का कार्य वन विकास अभिकरण द्वारा किया जा रहा है। कृषकों के पड़त भूमि, मेड़ों पर बांस रोपण अनुसंधान/विस्तार वन मण्डलों द्वारा किया जा रहा है। मिशन का मुखय उद्देश्य बांस की पर्याप्त रोपण सामग्री तैयारी करना, वन एवं ग्रामों के निकट बांस रोपण करना, कटाई तकनीक में सुधार करना, कटाई उपरांत प्रबंधन, बांस प्रसंस्करण केन्द्रों की स्थापना करना एवं मूल्य वृद्धि पश्चात् फर्नीचर, हस्तशिल्प निर्माण इत्यादि कार्यों में उपयोग करना, बाजार व्यवस्था का प्रबंधन करना है। इन उपायो से बसोड एवं बांस शिल्पकार परिवारों के सामाजिक-आर्थिक स्तर में सुधार लाना है। केन्द्रीय रोपणी की स्थापना एवं बांस रोपण का कार्य वन विभाग के माध्यम से, किसान एवं महिला रोपणी की स्थापना निजी, स्वसहायता समूह, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों एवं विभाग के माध्यम से किया जा रहा है। उन्नत कृषकों एवं विभागीय अमले के प्रशिक्षण का कार्य वन विभाग द्वारा भारत शासन के संस्थानों तथा स्थानीय अशासकीय संस्थानों के सहयोग से किया जा रहा है।
मिशन हेतु बांस की पॉच प्रजातियॉ चयनित की गई है, जिनके नाम है - डेंड्रोकेलेमस स्ट्रिक्टस, डेन्ड्रोकेलेमस एस्पर, बेम्बूसा बेम्बोस, बेम्बूसा वल्गेरिस एवं बेम्बूसा न्यूटॉस।
छत्तीसगढ़ राज्य में बांस मिशन वर्ष 2006-07 से प्रारंभ किया गया जिसके तहत -
राष्ट्रीय बांस मिशन छत्तीसगढ़ द्वारा वर्ष 2006 - 07 से अब तक राज्य के 32 वन विकास अभिकरणों में : -
|
वर्ष |
विमुक्त |
व्यय |
बांस वृक्षा रोपण वन क्षेत्र (हे. में) |
बांस वृक्षा रोपण गैर वन क्षेत्र (हे.में) |
बांस वृक्षा रोपण गैर वन क्षेत्र (राजस्व) (हे.में) |
योग बांस वृक्षा रोपण |
बिगड़े बांस भिर्रों का सुधार कार्य (हे. में) |
कुल योग |
|
2006-07 |
275 |
275 |
1625 |
0 |
0 |
1625 |
0 |
1625 |
|
2007-08 |
787 |
786 |
4636 |
1000 |
0 |
5636 |
4267 |
9903 |
|
2008-09 |
549 |
549 |
0 |
0 |
0 |
0 |
400 |
400 |
|
2009-10 |
427 |
425 |
2763 |
2000 |
0 |
4763 |
920 |
5683 |
|
2010-11 |
567 |
565.74 |
1199 |
1000 |
279 |
2478 |
315 |
2793 |
|
योग :- |
2605 |
2600.74 |
10223 |
4000 |
279 |
14502 |
5902 |
20404 |
|
2011-12 |
260 |
169.19 |
593 |
325 |
0 |
918 |
96 |
1014 |
|
महा योग |
2865 |
2769.93 |
10816 |
4325 |
279 |
15420 |
5998 |
21418 |
छत्तीसगढ़ राज्य में राष्ट्रीय बांस मिशन द्वारा बांस की सामग्री बनाने वाले परिवारों को प्रशिक्षित कर बाजार उपलब्ध कराने की योजना को क्रियान्वित करने के उद्देश्य से प्रत्येक जिले में बांस प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना की जा रही है। जिसमें प्रशिक्षण कार्यक्रम, भवन निर्माण कार्य, मशीनों का क्रय एवं स्थापना का कार्य सम्पादित किया जा रहा है। बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक जिले में बांस विपणन केन्द्र स्थापित करना प्रस्तावित है तथा इस दिशा में रायपुर मुख्यालय में बांस विपणन एवं विक्रय केन्द्र का लोकार्पण माननीय वन मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दिनांक 02 नवम्बर, 2010 को किया गया है। जिसमें माह अक्टूबर 2011 तक रूपये 1,53,000/- की सामग्री का विक्रय किया जा चुका है।
बांस उद्योगों की स्थापना की संभावनाओं को साकार करने के उद्देश्य से प्रदेश में वर्ष 2007-08 से अब तक कुल 28 प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना की गई है। जिसमें 1453 बांस शिल्पकार कार्य कर रहे है तथा माह नवंबर 2011 तक रूपये 48.06 लाख रूपये की सामग्री निर्मित कर रूपये 42.10 लाख की बिक्री की गई है शेष 5.96 लाख रूपये की सामग्री विभिन्न बांस प्रसंस्करण केन्द्रों में रखी गई है। बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक जिले में बांस विपणन केन्द्र स्थापित करना प्रस्तावित है। इस दिशा में रायपुर मुखयालय में बांस विपणन एवं विक्रय केन्द्र की स्थापना 02 नवम्बर, 2010 में की गयी है। जिसमें अब तक रूपये 3.16 लाख की सामग्री का विक्रय किया जा चुका है। बस्तर संभाग में 10 बांस प्रसंस्करण केन्द्र (1. बीजापुर-बीजापुर, 2. कांकेर-चारामा, 3. दंतेवाड़ा-कासोली, 4. पश्चिम भानुप्रतापपुर-बांदे, 5. सुकमा-दोरनापाल, 6.बस्तर-नानगूर, 7. नारायणपुर-नारायणपुर, 8. पूर्व भानुप्रतापपुर-अंतागढ़, 9. दक्षिण कोण्डागांव-कोण्डागांव, 10. बीजापुर-बीजापुर II),बिलासपुर संभाग में 9 केन्द्र (11.कोरबा-नोनबिर्रा, 12. रायगढ़-कोसमनारा, 13. बिलासपुर-रतनपुर, 14. कटघोरा-डोगानाला, 15. कोरबा-अशोकवाटिका, 16. रायगढ़-बरगढ़, 17. मरवाही-दानीकुण्डी, 18. बिलासपुर-लोरमी, 19. कटघोरा-ईरफ), रायपुर संभाग में 6 केन्द्र (20. राजनांदगांव-डोंगरगांव, 21. कवर्धा-लालपुर, 22. रायपुर-अमरूवा, 23. रायपुर-मुक्तांगन, 24. महासमुंद-बागबहरा, 25. दुर्ग-देवकर), सरगुजा संभाग में 3 केन्द्र (26. पूर्व सरगुजा-आमगांव, 27. कोरिया-कोरिया, 28. दक्षिण सरगुजा-उदयपुर) स्थापित है। इनमें से 13 केन्द्र (1) बस्तर-नानगूर, (2) दंतेवाड़ा-कासोली, (3) सुकमा-दोरनापाल, (4) बीजापुर-बीजापुर-I, (5) बीजापुर-बीजापुर-II, (6) कांकेर-चारामा, (7) पश्चिम भानुप्रतापपुर-बांदे, (8) नारायणपुर-नारायणपुर, (9) दक्षिण कोण्डागांव-कोण्डागांव, (10) कोरबा-नोनबिर्रा, (11) कोरबा-अशोक वाटिका, (12) पूर्व सरगुजा-आमगांव, (13) रायपुर-मुक्तांगन(निमोरा) केन्द्र सुचारू रूप से संचालित है।
बांस प्रसंस्करण केन्द्र को लाभप्रद इकाई के रूप में संचालित करने हेतु निजी उद्यमी, अशासकीय संस्थाओं से 9 बांस प्रसंस्करण केन्द्रों (1. रायपुर-मुक्तांगन (निमोरा), 2. कोरबा-नोनबिर्रा, 3. कोरबा-अशोकवाटिका, 4. रायपुर-अमरूवा, 5. महासमुंद-बागबहारा, 6. कवर्धा-लालपुर, 7. दक्षिण कोण्डागांव-कोण्डागांव, 8. बिलासपुर-रतनपुर, 9. राजनांदगांव - डोंगरगांव) को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अंतर्गत संचालित करने हेतु एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किये गये। वर्तमान में 3 केन्द्रों (1) मुक्तांगन (निमोरा), (2) नोनबिर्रा, (3) अशोक वाटिका (कोरबा) के केन्द्रों को सुचारू रूप से संचालित किया जा रहा है। शेष 06 केन्द्रों में कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। इन केन्द्रों में बसोड़ तथा अन्य बांस शिल्पकार परिवारों को उद्यमी के रूप में प्रशिक्षित किया जाकर उनकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा रहा है।
वर्तमान में प्रदेश में 28 बांस प्रसंस्करण केन्द्र स्थापित किये जा रहे है, विवरण निम्नानुसार है -
(राशि लाख में)
|
क्र |
वनमण्डल का नाम |
प्रसंस्करण केन्द्र |
तैयार सामग्री |
बिक्री |
शेष |
सामग्री |
कार्यरत दिनांक |
कार्यरत बांस शिल्पकारों की संख्या |
|
1 |
बीजापुर |
बीजापुर |
5.35 |
5.17 |
0.18 |
अगरबत्ती काडी, बुक रैक, टी.व्ही. स्टेण्ड, स्टूल |
सितंबर, 2008 |
750 |
|
2 |
कांकेर |
चारामा |
2.5 |
2.11 |
0.39 |
स्टूल, आराम कुर्सी, सजावटी सामान |
जनवरी, 2009 |
20 |
|
3 |
पश्चिम भानुप्रतापपुर |
बांदे |
5.84 |
5.12 |
0.72 |
सोफा सेट, टी-टेबल, स्टूल, सजावटी सामान |
फरवरी, 2009 |
25 |
|
4 |
कोरबा |
नोनबिर्रा |
3 |
2.72 |
0.28 |
आराम कुर्सी, स्टूल, कार्नर रैक, सोफा सेट |
जुलाई, 2007 |
10 |
|
5 |
पूर्व सरगुजा |
आमगांव |
3.25 |
2.68 |
0.57 |
सजावटी सामान, सूपा, झौहा |
अप्रैल, 2009 |
10 |
|
6 |
दंतेवाड़ा |
कासोली |
4.21 |
3.21 |
1 |
सोफा सेट, आराम कुर्सी, सजावटी सामग्री |
फरवरी, 2010 |
32 |
|
7 |
बस्तर |
नानगुर |
1.8 |
1.6 |
0.2 |
अगरबत्ती काड़ी |
अप्रैल, 2010 |
250 |
|
8 |
कोरबा |
अशोकवाटिका |
0.7 |
0.6 |
0.1 |
सोफा सेट, सजावटी सामग्री |
अगस्त, 2009 |
5 |
|
9 |
नारायणपुर |
नारायणपुर |
1.45 |
1.35 |
0.1 |
सजावटी सामान, उपयोगी सामान |
अपैल, 2010 |
10 |
|
10 |
रायपुर |
मुक्तांगन (निमोरा) |
0.3 |
0.25 |
0.05 |
सोफा सेट, टी-टेबल, स्टूल, कार्नर रेक, सजावटी सामान |
जुलाई, 2011 |
10 |
|
|
बैम्बू एम्पोरियम |
|
3.16 |
3.16 |
0 |
सोफा सेट, टी-टेबल, स्टूल, कार्नर रेक, सजावटी सामान |
नवंबर, 2010 |
8 |
|
|
राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय मेला |
|
12.1 |
11.78 |
0.32 |
सोफा सेट, टी-टेबल, स्टूल, कार्नर रेक, सजावटी सामान |
|
|
|
|
योग |
|
43.66 |
39.8 |
3.9 |
|
|
1130 |
अन्य बांस प्रसंस्करण केन्द्रों में बिक्री का विवरण निम्नानुसार है :-
|
11 |
रायगढ़ |
कोसमनारा |
2.64 |
1.8 |
0.84 |
सोफा सेट, सेंटर टेबल, सजावटी सामान |
अप्रैल, 2008 |
|
12 |
राजनांदगांव |
डोंगरगांव |
1.75 |
1.5 |
0.25 |
सजावटी सामान, उपयोगी सामान |
अप्रैल, 2008 |
|
13 |
कवर्धा |
लालपुर |
2.25 |
2.05 |
0.2 |
सोफा सेट, टी-टेबल, स्टूल, सजावटी सामान |
अक्टूबर, 2008 |
|
14 |
बिलासपुर |
रतनपुर |
1.25 |
1 |
0.25 |
सजावटी, उपयोगी सामान |
दिसंबर, 2008 |
|
15 |
रायपुर |
अमरूवा |
0.55 |
0.45 |
0.1 |
चटाई, सजावटी सामान |
अप्रैल, 2008 |
|
16 |
सुकमा |
दोरनापाल |
0.2 |
0.15 |
0.05 |
अगरबत्ती काड़ी |
अप्रैल, 2010 |
|
17 |
कटघोरा |
डोंगानाला |
0.7 |
0.6 |
0.1 |
सोफा सेट, फर्नीचर, सजावटी सामग्री |
फरवरी, 2009 |
|
18 |
पूर्व भानुप्रतापपुर |
अंतागढ़ |
0.7 |
0.6 |
0.1 |
सोफा सेट, टी-टेबल, स्टूल, सजावटी सामान |
मार्च, 2010 |
|
|
योग |
|
10.04 |
8.15 |
1.89 |
|
|
|
|
कुल योग |
|
53.7 |
47.9 |
5.8 |
|
|
|
क्र. |
वनमण्डल का नाम |
प्रसंस्करण केन्द्र का नाम |
|
1. |
दक्षिण कोण्डागांव |
कोण्डागांव |
|
2. |
रायगढ़ |
बरगढ़ |
|
3. |
कोरिया |
आनंदपुर |
|
4. |
बीजापुर |
बीजापुर II |
|
5. |
मरवाही |
दानीकुण्डी |
|
6. |
दक्षिण सरगुजा |
उदयपुर |
|
क्र. |
वनमण्डल का नाम |
प्रसंस्करण केन्द्र का नाम |
|
1. |
बिलासपुर |
लोरमी |
|
2. |
महासमुंद |
बागबहारा |
|
3. |
कटघोरा |
ईरफ(गोपालपुर) |
|
4. |
दुर्ग |
देवकर |
बांस की सामग्री निर्माण करने वाली जनजातियों को ग्रामीण परिवेश में बांस आधारित प्रशिक्षण दिलाया जाकर बांस आधारित कुटीर उद्योगों (बांस आधारित वस्तु) चटाई, सूपा, झौआ, सोफासेट, लालटेन, कुर्सी, टेबल, ट्रे, मंदिर, गिरजाघर, मोबाईल स्टैंड, कलश, ड्रेसिंग सेट एवं अन्य सजावटी/कलात्मक वस्तुओं का निर्माण कराया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के बांस शिल्पकारों द्वारा - (1) स्वदेशी मेला रायपुर 23 से 29 दिसंबर, 2011, (2) नेशनल ट्रेड एवं डेकोर फेयर, रायपुर 22 से 27 दिसम्बर, 2011, (3) केरल बैम्बू फेस्ट 08 से 11 दिसम्बर, 2011, (4) इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (नई दिल्ली) - दिनांक 14 से 27 नवम्बर, 2011, (5) छत्तीसगढ़ राज्योत्सव - दिनांक 01 से 05 नवम्बर, 2011, (6) हरिथोल्सवम् (कोच्ची) मेला, केरल - दिनांक 03 से 07 सितम्बर, 2011, (7) रायपुर राष्ट्रीय संगोष्ठी 12 से 13 जुलाई, 2011, (8) दिल्ली ग्रीन हॉट (नई दिल्ली में) - दिनांक 01 से 05 जून, 2011, (9) केरल बैम्बू फेस्ट - 2010 मेला, केरल (कोच्ची) - दिनांक 9 से 12 दिसम्बर, 2010, (10) इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर, नई दिल्ली - दिनांक 14 से 27 नवम्बर, 2010, (11) छत्तीसगढ़ राज्योत्सव - 2010 रायपुर, छत्तीसगढ़ - दिनांक 26 से 01 नवम्बर, 2010, (12) राष्ट्रीय माला बार क्राफ्ट मेला, केरल - दिनांक 16 से 30 दिसम्बर, 2009, (13) छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प मेला, रायपुर, छत्तीसगढ़ - दिनांक 2 से 7 दिसम्बर, 2009, (14) अंर्तराष्ट्रीय व्यापार मेला, नई दिल्ली - दिनांक 14 से 27 दिसम्बर, 2009, (15) कास्मो ट्रेवल, टूरिज्म एण्ड बिल्ड फेयर मेला, रायपुर छत्तीसगढ़ - दिनांक 9 से 12 अक्टूबर, 2009, (16) डोंगरगढ़ नवरात्री मेला, दुर्ग छत्तीसगढ़ - दिनांक 19 से 26 सितम्बर, 2009, (17) हरिथोल्सवम् (कोच्ची) मेला, केरल - दिनांक 28 से 31 अगस्त, 2009, (18) राष्ट्रीय माला बार क्राफ्ट मेला, केरल - दिनांक 16 से 30 दिसम्बर, 2008 बांस शिल्पकारा/स्टाफ सम्मिलित हुए एवं बांस निर्मित शिल्प सामग्रियां प्रदर्शिनी हेतु रखा गया एवं रूपये 11.78 लाख की बिक्री की गई।
प्रदेश में स्थापित बांस प्रसंस्करण केन्द्रों (1. बीजापुर-बीजापुर, 2. कांकेर-चारामा, 3. दंतेवाड़ा-कासोली, 4. पश्चिम भानुप्रतापपुर-बांदे, 5. सुकमा-दोरनापाल, 6.बस्तर-नानगूर, 7. नारायणपुर-नारायणपुर, 8. पूर्व भानुप्रतापपुर-अंतागढ़, 9. बीजापुर-बीजापुर II 10. रायगढ़ - कोसमनारा, 11. कटघोरा-डोगानाला, 12.रायगढ़-बरगढ़, 13. मरवाही-दानीकुण्डी, 14. बिलासपुर-लोरमी,15. कटघोरा-ईरफ 16. दुर्ग-देवकर 17. पूर्व सरगुजा-आमगांव, 18. कोरिया-कोरिया, 19. दक्षिण सरगुजा-उदयपुर) को पी.पी.पी. माडल अंतर्गत सुचारू संचालन हेतु निजी व्यक्ति, उद्यमी, अशासकीय संस्था, भारत सरकार के प्रतिष्ठिान से प्रस्ताव दिनांक 26.01.2012 तक आमंत्रिात है। विस्तृत विवरण वन विभाग की बांस मिशन शाखा तथा संबंधित वन मण्डलाधिकारी से प्राप्त किये जो सकते है।
जन जीवन विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में बांस की उपयोगिता को देखते हुए राष्ट्रीय बांस मिशन के सहयोग से वन विभाग द्वारा बांस रोपण को बढ़ावा देने हेतु छत्तीसगढ़ के किसानों की पड़त भूमि में वर्ष 2011-12 में 375 हे. क्षेत्र में 150000 बांस के रोपण हेतु कृषकों का चयन एवं रोपणी में पौधा तैयारी की जा रही है। वर्ष 2011 में 1000 हे. क्षेत्र में 4 लाख बांस पौधों के रोपण किया गया है। धरमजयगढ़ वनमण्डल में 150 हे = 60000 पौधे, अनुसंधान एवं विस्तार बिलासपुर वनमण्डल में 800 हे. = 320000 पौधे, जांजगीर चांपा वनमण्डल में 50 हे. = 20000 बांस पौधों का रोपण पूर्ण किया गया। धरमजयगढ़ वनमण्डल अंतर्गत ग्राम रूकडेगा के श्री मधुकर सिंघानिया द्वारा 12000 पौधे, ग्राम झारण के श्री सुरेश सिंघानिया द्वारा 8000 पौधे, ग्राम जामबहार के श्री तुलसीराम द्वारा 5681 पौधे, ग्राम तोलगे के श्री चक्रधर द्वारा 5273 पौधे, ग्राम कहरचुआ की श्रीमती राधा बाई द्वारा 5724 पौधे रोपित किये गये है। जांजगीर-चांपा वनमण्डल अंतर्गत ग्राम लखुर्री के श्री ओमकार प्रसाद केसरवानी द्वारा 5000 पौधे, ग्राम लखुर्री की श्रीमती रीमा केसरवानी द्वारा 3000 पौधे, ग्राम लखुर्री की श्रीमती भांति बाई केसरवानी द्वारा 3000 पौधे रोपित किये गये है। अनुसंधान एवं विस्तार वनमण्डल बिलासपुर अंतर्गत ग्राम लाखासार के श्री प्रमोद शर्मा द्वारा 1000 पौधे, ग्राम देवरी के श्री गनपत सिंह द्वारा 1750 पौधे, ग्राम नवागांव के श्री विश्राम द्वारा 1000 पौधे, ग्राम नवागांव के श्री राजकुमार द्वारा 2500 पौधे, ग्राम नवागांव के श्री बिसाहूराम द्वारा 2500 पौधे, ग्राम नवागांव के श्री पिताम्बर द्वारा 2000 पौधों का रोपण अपने निजी पड़त भूमि में किये गये है। 5 रूपया प्रत्येक पौधे की कीमत तथा 5 रूपया अनुदान दिया गया है। उप वनमण्डलाधिकारी/परिक्षेत्र अधिकारी के भौतिक सत्यापन पश्चात रोपित पौधे में से 90 प्रतिशत पौधे जीवित रहने पर 10 रूपये प्रति पौधे की दर से द्वितीय अनुदान दिया जायेगा। बांस रोपण हेतु कृषकों को पहले वर्ष रूपये 10/- प्रति रोपित पौधा अनुदान दिया जाता है।