Last Updated on : 08 February 2012 16:30:48

Bamboo Mission


छत्तीसगढ़ राज्य में बांस मिशन


छत्तीसगढ़ राज्य में बांस मिशन वर्ष 2006-07 से स्थापित है। इसका क्रियान्वयन वन विभाग द्वारा किया जा रहा है। राज्य स्तरीय बांस विकास प्राधिकरण के क्रियान्वयन हेतु मुख्‍य वन संरक्षक बांस मिशन को मिशन निदेशक नियुक्त किया गया है। प्रदेश के वन क्षेत्रो में बांस रोपण का कार्य वन विकास अभिकरण द्वारा किया जा रहा है। कृषकों के पड़त भूमि, मेड़ों पर बांस रोपण अनुसंधान/विस्तार वन मण्डलों द्वारा किया जा रहा है। मिशन का मुखय उद्‌देश्य बांस की पर्याप्त रोपण सामग्री तैयारी करना, वन एवं ग्रामों के निकट बांस रोपण करना, कटाई तकनीक में सुधार करना, कटाई उपरांत प्रबंधन, बांस प्रसंस्करण केन्द्रों की स्थापना करना एवं मूल्य वृद्धि पश्चात्‌ फर्नीचर, हस्तशिल्प निर्माण इत्यादि कार्यों में उपयोग करना, बाजार व्यवस्था का प्रबंधन करना है। इन उपायो से बसोड एवं बांस शिल्पकार परिवारों के सामाजिक-आर्थिक स्तर में सुधार लाना है। केन्द्रीय रोपणी की स्थापना एवं बांस रोपण का कार्य वन विभाग के माध्यम से, किसान एवं महिला रोपणी की स्थापना निजी, स्वसहायता समूह, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों एवं विभाग के माध्यम से किया जा रहा है। उन्नत कृषकों एवं विभागीय अमले के प्रशिक्षण का कार्य वन विभाग द्वारा भारत शासन के संस्थानों तथा स्थानीय अशासकीय संस्थानों के सहयोग से किया जा रहा है। 

मिशन हेतु बांस की पॉच प्रजातियॉ चयनित की गई है, जिनके नाम है - डेंड्रोकेलेमस स्ट्रिक्टस, डेन्ड्रोकेलेमस एस्पर, बेम्बूसा बेम्बोस, बेम्बूसा वल्गेरिस एवं बेम्बूसा न्यूटॉस।


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मिशन का मुख्‍य उद्‌देश्य


  • बांस वनों का पुररूद्धार एवं किसानों के निजी पड़त भूमि में बांस की खेती को प्रोत्साहित करना।
  • बसोड़ एवं बांस उद्योग से जुड़े परम्परागत समुदायों के क्षमता का उन्नयन करना है। 
  • बांस आधारित उद्योगों को नई तकनीकी लागू करने एवं विश्व में बदलते प्रतिस्पर्धात्मक बाजार व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए नई सामग्री के निर्माण एवं निर्यात हेतु प्रोत्साहित करना।
  • बांस से जुड़े उद्योगों, बाजार व्यवस्था, अनुसंधान केन्द्रों, शासकीय संस्थानों एवं बांस के व्यापार से जुड़े व्यवसाईयों के बीच संवाद स्थापित करना।
  • वन, कृषि उद्यानिकी एवं ग्रामोद्योग विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर बांस क्षेत्रों में वृद्धि, बांस उद्योगों को प्रोत्साहन एवं जीवन यापन हेतु बांस पर आधारित समुदायों के क्षमता का निर्माण करना।
  • बांस के पर्याप्त रोपण सामग्री तैयार करना।
  • वन एवं ग्रामों के निकट बांस रोपण एवं प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना।
  • कटाई तकनीक, कटाई उपरांत प्रबंधन एवं इनका वास्तविक उपयोग, हस्तशिल्प कला से जुड़े कार्यों को प्रोत्साहित करना, इत्यादी।
  • बसोड़, कमार, कंडरा, बिरहोर, पण्डो, पहाड़ी कोरवा परिवारों के सामाजिक-आर्थिक स्तर में सुधार लाना।
  • किसान एवं महिलाओं को स्वावलंबी बनाने हेतु किसान एवं महिला रोपणी की स्थापना।
  • राज्य स्तर पर बांस एवं बांस के नवीनतम एवं उत्पाद को लोकप्रिक बनाने हेतु कार्यशालाओं का आयोजन करना।


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छत्तीसगढ़ राज्य में बांस मिशन से संबंधित मुख्‍य तथ्य


छत्तीसगढ़ राज्य में बांस मिशन वर्ष 2006-07 से प्रारंभ किया गया जिसके तहत -

  • वर्ष 2006 - 07 में केन्द्र सरकार से राशि 275.34 लाख रूपये का आबंटन प्राप्त हुआ।  इसके अंतर्गत 864 हेक्टेयर वन क्षेत्र में बांस रोपण हुआ। बांस के पौधे तैयार करने हेतु 18 वनमण्डलों में 16 केन्द्रीय रोपणी, 8 किसान रोपणी एवं 8 महिला रोपणी (विभागीय एवं निजी) में स्थापित की गई। प्रचार-प्रसार का कार्य स्लोगन युक्त पेम्प्लेट्‌स एवं साईन बोर्ड के माध्यम से किया जा रहा है। कुल 90 कृषकों को बांस की रोपणी, प्रसंस्करण  संबंधित विषयों के संबंध में प्रशिक्षित किया गया।  40 क्षेत्रीय अमले को प्रशिक्षित किया गया। विभिन्न  वन वृत्तों में 3 जिला स्तरीय कार्यशाला एवं 1 राज्य स्तरीय सेमीनार आयोजित की गई। इन कार्यों पर रूपये 275.00 लाख व्यय किया गया। इससे 238833 मानव दिवस रोजगार सृजन किया गया।  
  • वर्ष 2007 - 08 में केन्द्र सरकार से राशि 786.95 लाख रूपये का आबंटन प्राप्त हुआ।  इसके अंतर्गत 2500 हेक्टेयर वन क्षेत्र में बांस रोपण हुआ।  2000 हेक्टेयर क्षेत्र में बिगड़े बांस वनों का सुधार कार्य किया गया।  1000 हेक्टेयर में कृषकों की पड़त भूमि, मेड़ पर उद्यानिकी संचालनालय रायपुर के माध्यम से बांस रोपण कराया गया। बांस के पौधे तैयार करने हेतु राज्य के 32 वनमण्डलों में 20 केन्द्रीय रोपणी, 15 किसान रोपणी एवं 16 महिला रोपणी (विभागीय एवं निजी) में स्थापित की गई। कुल 500 कृषकों को बांस की रोपणी, प्रसंस्करण संबंधित विषयों के संबंध में प्रशिक्षित किया गया। विभिन्न वन वृत्तों में 20 क्षेत्रीय अमले को प्रशिक्षित किया गया। 14 बांस प्रसंस्करण केन्द्रों की स्थापना की गई। इन कार्यों पर रूपये 786.00 लाख व्यय किया गया। इससे 635149 मानव दिवस रोजगार सृजन किया किया।
  • वर्ष 2008 - 09 में केन्द्र सरकार से राशि 548.96 लाख रूपये का आबंटन प्राप्त हुआ।  इसके अंतर्गत 2500 हेक्टेयर वन क्षेत्र में बांस रोपण का रख-रखाव कार्य किया गया। 400 हेक्टेयर क्षेत्र में बिगड़े बांस वनों का सुधार कार्य, बांस के पौधे तैयार करने हेतु राज्य के 2 वनमण्डलों में 2 केन्द्रीय रोपणी स्थापित की गई।  कुल 480 कृषकों को बांस की रोपणी, प्रसंस्करण  संबंधित विषयों के संबंध में प्रशिक्षित किया गया। 50 क्षेत्रीय अमले को प्रशिक्षित किया गया। विभिन्न  वन वृत्तों में 6 जिला स्तरीय कार्यशाला एवं 1 राज्य स्तरीय सेमीनार आयोजित की गई। 6 बांस प्रसंस्करण केन्द्रों की स्थापना की गई। इन कार्यों पर रूपये 549.00 लाख व्यय किया गया। इससे 415294 मानव दिवस रोजगार सृजन किया गया।
  • वर्ष 2009 - 10 में केन्द्र सरकार से राशि 427.46 लाख रूपये का आबंटन प्राप्त हुआ।  इसके अंतर्गत 2255 हेक्टेयर वन क्षेत्र में बांस वृक्षारोपण किया गया। 500 हेक्टेयर क्षेत्र में बिगड़े बांस वनों का सुधार कार्य, किसानों की पड़त भूमि, मेड पर 2000 हेक्टेयर बांस वृक्षा रोपण किया गया। राज्य के 32 वनमण्डलों में कुल 301 कृषकों को बांस की रोपणी, प्रसंस्करण संबंधित विषयों के संबंध में प्रशिक्षित किया गया।  50 क्षेत्रीय अमले को प्रशिक्षित किया गया। विभिन्न वन वृत्तों में 6 जिला स्तरीय कार्यशाला एवं 1 राज्य स्तरीय सेमीनार आयोजित की गई। 8 बांस प्रसंस्करण केन्द्रों की स्थापना की गई। इन कार्यों पर रूपये 425.00 लाख व्यय किया गया। इससे 292495 मानव दिवस रोजगार सृजन किया गया।
  • वर्ष 2010 - 11 में केन्द्र सरकार से राशि 567.00 लाख रूपये का आबंटन प्राप्त हुआ।  इसके अंतर्गत 1130 हेक्टेयर वन क्षेत्र में बांस वृक्षारोपण किया गया। 144 हेक्टेयर क्षेत्र में बिगड़े बांस वनों का सुधार कार्य किया गया। 1000 हेक्टेयर में कृषकों की पड़त भूमि, मेड़ पर बांस वृक्षा रोपण गैर वन क्षेत्र किया गया। 279 हे. में बांस वृक्षारोपण गैर वन क्षेत्र (राजस्व भूमि) राज्य के 32 वनमण्डलों में कुल 151 कृषकों को बांस की रोपणी, प्रसंस्करण संबंधित विषयों के संबंध में प्रशिक्षित किया गया। विभिन्न वनमण्डलों में 20 क्षेत्रीय अमले को प्रशिक्षित किया गया। इन कार्यों पर रूपये 564.74 लाख व्यय किया गया। इससे 273724 मानव दिवस रोजगार सृजन किया गया।
  • वर्ष 2011 - 12 में केन्द्र सरकार से राशि 542.74 लाख रूपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है। जिसके विरूद्ध राशि रूपये 260.00 लाख का आबंटन प्राप्त हुआ। इसके अंतर्गत 540 हेक्टेयर वन क्षेत्र में बांस वृक्षारोपण, 96 हेक्टेयर गैर वन क्षेत्र में बिगड़े बांस वनों का सुधार कार्य, 375 हेक्टेयर में कृषकों की पड़त भूमि, मेड़ पर बांस वृक्षा रोपण गैर वन क्षेत्र, राज्य के 6 वनमण्डलों में जिला स्तरीय कार्यशाला एवं 1 राज्य स्तरीय सेमीनार, राज्य के 32 वनमण्डलों में कुल 150 कृषकों को बांस की रोपणी, प्रसंस्करण संबंधित विषयों के संबंध में प्रशिक्षण,  विभिन्न वनमण्डलों में 30 क्षेत्रीय अमले का एवं 50 एवं शिल्पकारों का प्रशिक्षण का कार्य प्रगति पर है। इन कार्यों पर रूपये 169.19 लाख व्यय किया गया। इससे 71345 मानव दिवस रोजगार सृजन किया गया।



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गोशवारा


राष्ट्रीय बांस मिशन छत्तीसगढ़ द्वारा वर्ष 2006 - 07 से अब तक राज्य के 32 वन विकास अभिकरणों में : -  

  • वन क्षेत्र में 7289 हे. बांस रोपण, किसानों की पड़त, निजी भूमि में 4000 हे. बांस रोपण, 3044 हे. क्षेत्र बिगड़े बांस वनों/गैर वन क्षेत्र में भिर्रों का सुधार तथा 279 हे. राजस्व क्षेत्र में बांस रोपण किया गया है। 
  • 29 महिला रोपणी, 28 किसान रोपणी तथा 38 केन्द्रीय रोपणी विभिन्न वन विकास अभिकरणों में स्थापित की गई है।
  • राज्य के भीतर एवं राज्य के बाहर कुल 1672 कृषकों को, 210 क्षेत्रीय अमला को प्रशिक्षण एवं 147 बांस शिल्पकारों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 
  • 3 राज्य स्तरीय एवं 15 जिला स्तरीय सेमीनार आयोजित किये गये है। कुल प्राप्त रूपये 2865.00 लाख में रूपय 2769.93 लाख व्यय किया गया है। 
वर्ष वार बजट विवरण निम्नानुसार है -

वर्ष

विमुक्त
राशि

व्यय

बांस वृक्षा रोपण वन क्षेत्र (हे. में)

बांस वृक्षा रोपण गैर वन क्षेत्र (हे.में)

बांस वृक्षा रोपण गैर वन क्षेत्र (राजस्व) (हे.में)

योग बांस वृक्षा रोपण

बिगड़े बांस भिर्रों का सुधार कार्य (हे. में)

कुल योग

2006-07

275

275

1625

0

0

1625

0

1625

2007-08

787

786

4636

1000

0

5636

4267

9903

2008-09

549

549

0

0

0

0

400

400

2009-10

427

425

2763

2000

0

4763

920

5683

2010-11

567

565.74

1199

1000

279

2478

315

2793

योग :-

2605

2600.74

10223

4000

279

14502

5902

20404

2011-12

260

169.19

593

325

0

918

96

1014

महा योग

2865

2769.93

10816

4325

279

15420

5998

21418

वर्ष 2011 - 12 हेतु वार्षिक कार्य योजना रूपये 542.74 लाख की स्वीकृति प्राप्त हुई है।

  • बांस रोपण से संबंधित तकनीकी पहलुओं एवं बांस मिशन के उद्‌देश्यों को पंचायत स्तर तक फैलाने हेतु समय-समय पर पोस्टर एवं ब्रोशर तैयार किये गये जिनका विमोचन माननीय वन मंत्रीजी छत्तीसगढ़ शासन के करकमलों द्वारा हुआ।



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बैम्बू एम्पोरियम


छत्तीसगढ़ राज्य में राष्ट्रीय बांस मिशन द्वारा बांस की सामग्री बनाने वाले परिवारों को प्रशिक्षित कर बाजार उपलब्ध कराने की योजना को क्रियान्वित करने के उद्‌देश्य से प्रत्येक जिले में बांस प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना की जा रही है। जिसमें प्रशिक्षण कार्यक्रम, भवन निर्माण कार्य, मशीनों का क्रय एवं स्थापना का कार्य सम्पादित किया जा रहा है। बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्‌देश्य से प्रत्येक जिले में बांस विपणन केन्द्र स्थापित करना प्रस्तावित है तथा इस दिशा में रायपुर मुख्‍यालय में बांस विपणन एवं विक्रय केन्द्र का लोकार्पण माननीय वन मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दिनांक  02 नवम्बर, 2010 को किया गया है।  जिसमें माह अक्टूबर 2011 तक रूपये 1,53,000/- की सामग्री का विक्रय किया जा चुका है। 


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बांस प्रसंस्करण केन्द्रों की स्थापना


बांस उद्योगों की स्थापना की संभावनाओं को साकार करने के उद्‌देश्य से प्रदेश में वर्ष 2007-08 से अब तक कुल 28 प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना की गई है। जिसमें 1453 बांस शिल्पकार कार्य कर रहे है तथा माह नवंबर 2011 तक रूपये 48.06 लाख रूपये की सामग्री निर्मित कर रूपये 42.10 लाख की बिक्री की गई है शेष 5.96 लाख रूपये की सामग्री विभिन्न बांस प्रसंस्करण केन्द्रों में रखी गई है। बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्‌देश्य से प्रत्येक जिले में बांस विपणन केन्द्र स्थापित करना प्रस्तावित है। इस दिशा में रायपुर मुखयालय में बांस विपणन एवं विक्रय केन्द्र की स्थापना 02 नवम्बर, 2010 में की गयी है। जिसमें अब तक रूपये  3.16 लाख की सामग्री का विक्रय किया जा चुका है। बस्तर संभाग में 10 बांस प्रसंस्करण केन्द्र (1. बीजापुर-बीजापुर, 2. कांकेर-चारामा, 3. दंतेवाड़ा-कासोली, 4. पश्चिम भानुप्रतापपुर-बांदे, 5. सुकमा-दोरनापाल, 6.बस्तर-नानगूर, 7. नारायणपुर-नारायणपुर, 8. पूर्व भानुप्रतापपुर-अंतागढ़, 9. दक्षिण कोण्डागांव-कोण्डागांव, 10. बीजापुर-बीजापुर II),बिलासपुर संभाग में 9 केन्द्र (11.कोरबा-नोनबिर्रा, 12. रायगढ़-कोसमनारा, 13. बिलासपुर-रतनपुर, 14. कटघोरा-डोगानाला, 15. कोरबा-अशोकवाटिका, 16. रायगढ़-बरगढ़, 17. मरवाही-दानीकुण्डी, 18. बिलासपुर-लोरमी, 19. कटघोरा-ईरफ), रायपुर संभाग में 6 केन्द्र (20. राजनांदगांव-डोंगरगांव, 21. कवर्धा-लालपुर, 22. रायपुर-अमरूवा, 23. रायपुर-मुक्तांगन, 24. महासमुंद-बागबहरा, 25. दुर्ग-देवकर), सरगुजा संभाग में 3 केन्द्र (26. पूर्व सरगुजा-आमगांव, 27. कोरिया-कोरिया, 28. दक्षिण सरगुजा-उदयपुर) स्थापित है। इनमें से 13 केन्द्र (1) बस्तर-नानगूर, (2) दंतेवाड़ा-कासोली, (3) सुकमा-दोरनापाल, (4) बीजापुर-बीजापुर-I, (5) बीजापुर-बीजापुर-II, (6) कांकेर-चारामा, (7) पश्चिम भानुप्रतापपुर-बांदे, (8) नारायणपुर-नारायणपुर, (9) दक्षिण कोण्डागांव-कोण्डागांव, (10) कोरबा-नोनबिर्रा, (11) कोरबा-अशोक वाटिका, (12) पूर्व सरगुजा-आमगांव, (13) रायपुर-मुक्तांगन(निमोरा) केन्द्र सुचारू रूप से संचालित है। 

बांस प्रसंस्करण केन्द्र को लाभप्रद इकाई के रूप में संचालित करने हेतु निजी उद्यमी, अशासकीय संस्थाओं से 9 बांस प्रसंस्करण केन्द्रों (1. रायपुर-मुक्तांगन (निमोरा), 2. कोरबा-नोनबिर्रा, 3. कोरबा-अशोकवाटिका, 4. रायपुर-अमरूवा, 5. महासमुंद-बागबहारा, 6. कवर्धा-लालपुर, 7. दक्षिण कोण्डागांव-कोण्डागांव, 8. बिलासपुर-रतनपुर, 9. राजनांदगांव - डोंगरगांव) को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अंतर्गत संचालित करने हेतु एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किये गये। वर्तमान में 3 केन्द्रों (1) मुक्तांगन (निमोरा), (2) नोनबिर्रा, (3) अशोक वाटिका (कोरबा) के केन्द्रों को सुचारू रूप से संचालित किया जा रहा है। शेष 06 केन्द्रों में कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। इन केन्द्रों में बसोड़ तथा अन्य बांस शिल्पकार परिवारों को उद्यमी के रूप में प्रशिक्षित किया जाकर उनकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा रहा है।  

वर्तमान में प्रदेश में 28 बांस प्रसंस्करण केन्द्र स्थापित किये जा रहे है, विवरण निम्नानुसार है -

(राशि लाख में)

क्र

वनमण्डल का नाम

प्रसंस्करण केन्द्र

तैयार सामग्री

बिक्री

शेष

सामग्री

कार्यरत दिनांक

कार्यरत बांस शिल्पकारों की संख्‍या

1

बीजापुर

बीजापुर

5.35

5.17

0.18

अगरबत्ती काडी, बुक रैक, टी.व्ही. स्टेण्ड, स्टूल

सितंबर, 2008

750

2

कांकेर

चारामा

2.5

2.11

0.39

स्टूल, आराम कुर्सी, सजावटी सामान

जनवरी, 2009

20

3

पश्चिम भानुप्रतापपुर

बांदे

5.84

5.12

0.72

सोफा सेट, टी-टेबल, स्टूल, सजावटी सामान

फरवरी, 2009

25

4

कोरबा

नोनबिर्रा

3

2.72

0.28

आराम कुर्सी, स्टूल, कार्नर रैक, सोफा सेट

जुलाई, 2007

10

5

पूर्व सरगुजा

आमगांव

3.25

2.68

0.57

सजावटी सामान, सूपा, झौहा

अप्रैल, 2009

10

6

दंतेवाड़ा

कासोली

4.21

3.21

1

सोफा सेट, आराम कुर्सी, सजावटी सामग्री

फरवरी, 2010

32

7

बस्तर

नानगुर

1.8

1.6

0.2

अगरबत्ती काड़ी

अप्रैल, 2010

250

8

कोरबा

अशोकवाटिका

0.7

0.6

0.1

सोफा सेट, सजावटी सामग्री

अगस्त, 2009

5

9

नारायणपुर

नारायणपुर

1.45

1.35

0.1

सजावटी सामान, उपयोगी सामान

अपैल, 2010

10

10

रायपुर

मुक्तांगन (निमोरा)

0.3

0.25

0.05

सोफा सेट, टी-टेबल, स्टूल, कार्नर रेक, सजावटी सामान

जुलाई, 2011

10

 

बैम्बू एम्पोरियम

 

3.16

3.16

0

सोफा सेट, टी-टेबल, स्टूल, कार्नर रेक, सजावटी सामान

नवंबर, 2010

8

 

राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय मेला

 

12.1

11.78

0.32

सोफा सेट, टी-टेबल, स्टूल, कार्नर रेक, सजावटी सामान

 

 

 

योग

 

43.66

39.8

3.9

 

 

1130

अन्य बांस प्रसंस्करण केन्द्रों में बिक्री का विवरण निम्नानुसार है :-

11

रायगढ़

कोसमनारा

2.64

1.8

0.84

सोफा सेट, सेंटर टेबल, सजावटी सामान

अप्रैल, 2008

12

राजनांदगांव

डोंगरगांव

1.75

1.5

0.25

सजावटी सामान, उपयोगी सामान

अप्रैल, 2008

13

कवर्धा

लालपुर

2.25

2.05

0.2

सोफा सेट, टी-टेबल, स्टूल, सजावटी सामान

अक्टूबर, 2008

14

बिलासपुर

रतनपुर

1.25

1

0.25

सजावटी, उपयोगी सामान

दिसंबर, 2008

15

रायपुर

अमरूवा

0.55

0.45

0.1

चटाई, सजावटी सामान

अप्रैल, 2008

16

सुकमा

दोरनापाल

0.2

0.15

0.05

अगरबत्ती काड़ी

अप्रैल, 2010

17

कटघोरा

डोंगानाला

0.7

0.6

0.1

सोफा सेट, फर्नीचर, सजावटी सामग्री

फरवरी, 2009

18

पूर्व भानुप्रतापपुर

अंतागढ़

0.7

0.6

0.1

सोफा सेट, टी-टेबल, स्टूल, सजावटी सामान

मार्च, 2010

 

योग

 

10.04

8.15

1.89

 

 

 

कुल योग

 

53.7

47.9

5.8

 

 


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प्रशिक्षण दिया जा रहा है


क्र.

वनमण्डल का नाम

प्रसंस्करण केन्द्र का नाम

1.

दक्षिण कोण्डागांव

कोण्डागांव

2.

रायगढ़

बरगढ़

3.

कोरिया

आनंदपुर

4.

बीजापुर

बीजापुर II

5.

मरवाही

दानीकुण्डी

6.

दक्षिण सरगुजा

उदयपुर


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स्थापना कार्य प्रगति पर


क्र.

वनमण्डल का नाम

प्रसंस्करण केन्द्र का नाम

1.

बिलासपुर

लोरमी

2.

महासमुंद

बागबहारा

3.

कटघोरा

ईरफ(गोपालपुर)

4.

दुर्ग

देवकर

  • बांस की सामग्री निर्माण करने वाली जनजातियों को ग्रामीण परिवेश में बांस आधारित प्रशिक्षण दिलाया जाकर बांस आधारित कुटीर उद्योगों (बांस आधारित वस्तु) चटाई, सूपा, झौआ, सोफासेट, लालटेन, कुर्सी, टेबल, ट्रे, मंदिर, गिरजाघर, मोबाईल स्टैंड, कलश, ड्रेसिंग सेट एवं अन्य सजावटी/कलात्मक वस्तुओं का निर्माण कराया जा रहा है।


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परिवहन अनुज्ञा पत्र का अधिकार ग्राम पंचायत को


कृषकों को अपनी पड़त भूमि, मेड़, बाड़ी आदि पर बांस रोपण को बढ़ावा देने के उद्‌देश्य से प्रदेश के सात जिलों - सरगुजा, जशपुर, जांजगीरचांपा, कोरबा, धमतरी, कबीरधाम और महासमुंद में जिले के अंदर बांस परिवहन हेतु परिवहन अनुज्ञा पत्रा जारी करने के अधिकार संबंधित ग्राम पंचायतों को प्रदान किये गये है।

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राष्ट्रीय मेलों में सहभागिता


छत्तीसगढ़ के बांस शिल्पकारों द्वारा - (1) स्वदेशी मेला रायपुर 23 से 29 दिसंबर, 2011, (2) नेशनल ट्रेड एवं डेकोर फेयर, रायपुर 22 से 27 दिसम्बर, 2011, (3) केरल बैम्बू फेस्ट 08 से 11 दिसम्बर, 2011, (4) इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (नई दिल्ली) - दिनांक 14 से 27 नवम्बर, 2011, (5) छत्तीसगढ़ राज्योत्सव - दिनांक 01 से 05 नवम्बर, 2011, (6) हरिथोल्सवम्‌ (कोच्ची) मेला, केरल - दिनांक 03 से 07 सितम्बर, 2011, (7) रायपुर राष्ट्रीय संगोष्ठी 12 से 13 जुलाई, 2011, (8) दिल्ली ग्रीन हॉट (नई दिल्ली में) - दिनांक 01 से 05 जून, 2011, (9) केरल बैम्बू फेस्ट - 2010 मेला, केरल (कोच्ची) - दिनांक 9 से 12 दिसम्बर, 2010, (10) इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर, नई दिल्ली - दिनांक 14 से 27 नवम्बर, 2010, (11) छत्तीसगढ़ राज्योत्सव - 2010 रायपुर, छत्तीसगढ़ - दिनांक 26 से 01 नवम्बर, 2010, (12) राष्ट्रीय माला बार क्राफ्ट मेला, केरल - दिनांक 16 से 30 दिसम्बर, 2009, (13) छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प मेला, रायपुर, छत्तीसगढ़ - दिनांक 2 से 7 दिसम्बर, 2009, (14) अंर्तराष्ट्रीय व्यापार मेला, नई दिल्ली - दिनांक 14 से 27 दिसम्बर, 2009, (15) कास्मो ट्रेवल, टूरिज्‍म एण्ड बिल्ड फेयर मेला, रायपुर छत्तीसगढ़ - दिनांक 9 से 12 अक्टूबर, 2009, (16) डोंगरगढ़ नवरात्री मेला, दुर्ग छत्तीसगढ़ - दिनांक 19 से 26 सितम्बर, 2009, (17) हरिथोल्सवम्‌ (कोच्ची) मेला, केरल - दिनांक 28 से 31 अगस्त, 2009, (18) राष्ट्रीय माला बार क्राफ्ट मेला, केरल - दिनांक 16 से 30 दिसम्बर, 2008 बांस शिल्पकारा/स्टाफ सम्मिलित हुए एवं बांस निर्मित शिल्प सामग्रियां प्रदर्शिनी हेतु रखा गया एवं रूपये 11.78 लाख की बिक्री की गई। 

राष्ट्रीय मालाबार क्राफ्ट मेला 16 - 30 दिसम्बर, 2008 में छत्तीसगढ़ राज्य के बांस शिल्पकारों को राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।

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पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप के अंतर्गत प्रस्ताव


प्रदेश में स्थापित बांस प्रसंस्करण केन्द्रों (1. बीजापुर-बीजापुर, 2. कांकेर-चारामा, 3. दंतेवाड़ा-कासोली, 4. पश्चिम भानुप्रतापपुर-बांदे, 5. सुकमा-दोरनापाल, 6.बस्तर-नानगूर, 7. नारायणपुर-नारायणपुर, 8. पूर्व भानुप्रतापपुर-अंतागढ़, 9. बीजापुर-बीजापुर II 10. रायगढ़ - कोसमनारा, 11. कटघोरा-डोगानाला, 12.रायगढ़-बरगढ़, 13. मरवाही-दानीकुण्डी, 14. बिलासपुर-लोरमी,15. कटघोरा-ईरफ 16. दुर्ग-देवकर 17. पूर्व सरगुजा-आमगांव, 18. कोरिया-कोरिया, 19. दक्षिण सरगुजा-उदयपुर) को पी.पी.पी. माडल अंतर्गत सुचारू संचालन हेतु निजी व्यक्ति, उद्यमी, अशासकीय संस्था, भारत सरकार के प्रतिष्ठिान से प्रस्ताव दिनांक 26.01.2012 तक आमंत्रिात है। विस्तृत विवरण वन विभाग की बांस मिशन शाखा तथा संबंधित वन मण्डलाधिकारी से प्राप्त किये जो सकते है। 



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कृषकों हेतु अनुदान योजना


जन जीवन विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में बांस की उपयोगिता को देखते हुए राष्ट्रीय बांस मिशन के सहयोग से वन विभाग द्वारा बांस रोपण को बढ़ावा देने हेतु छत्तीसगढ़ के किसानों की पड़त भूमि में वर्ष 2011-12 में 375 हे. क्षेत्र में 150000 बांस के रोपण हेतु कृषकों का चयन एवं रोपणी में पौधा तैयारी की जा रही है। वर्ष 2011 में 1000 हे. क्षेत्र में 4 लाख बांस पौधों के रोपण किया गया है।  धरमजयगढ़ वनमण्डल में 150 हे = 60000 पौधे, अनुसंधान एवं विस्तार बिलासपुर वनमण्डल में 800 हे. = 320000 पौधे, जांजगीर चांपा वनमण्डल में 50 हे. = 20000 बांस पौधों का रोपण पूर्ण किया गया। धरमजयगढ़ वनमण्डल अंतर्गत ग्राम रूकडेगा के श्री मधुकर सिंघानिया द्वारा 12000 पौधे, ग्राम झारण के श्री सुरेश सिंघानिया द्वारा 8000 पौधे, ग्राम जामबहार के श्री तुलसीराम द्वारा 5681 पौधे, ग्राम तोलगे के श्री चक्रधर द्वारा 5273 पौधे, ग्राम कहरचुआ की श्रीमती राधा बाई द्वारा 5724 पौधे रोपित किये गये है। जांजगीर-चांपा वनमण्डल अंतर्गत ग्राम लखुर्री के श्री ओमकार प्रसाद केसरवानी द्वारा 5000 पौधे, ग्राम लखुर्री की श्रीमती रीमा केसरवानी द्वारा 3000 पौधे, ग्राम लखुर्री की श्रीमती भांति बाई केसरवानी द्वारा 3000 पौधे रोपित किये गये है। अनुसंधान एवं विस्तार वनमण्डल बिलासपुर अंतर्गत ग्राम लाखासार के श्री प्रमोद शर्मा द्वारा 1000 पौधे, ग्राम देवरी के श्री गनपत सिंह द्वारा 1750 पौधे, ग्राम नवागांव के श्री विश्राम द्वारा 1000 पौधे, ग्राम नवागांव के श्री राजकुमार द्वारा 2500 पौधे, ग्राम नवागांव के श्री बिसाहूराम द्वारा 2500 पौधे, ग्राम नवागांव के श्री पिताम्बर द्वारा 2000 पौधों का रोपण अपने निजी पड़त भूमि में किये गये है। 5 रूपया प्रत्येक पौधे की कीमत तथा 5 रूपया अनुदान दिया गया है। उप वनमण्डलाधिकारी/परिक्षेत्र अधिकारी के भौतिक सत्यापन पश्चात रोपित पौधे में से 90 प्रतिशत पौधे जीवित रहने पर 10 रूपये प्रति पौधे की दर से द्वितीय अनुदान दिया जायेगा।  बांस रोपण हेतु कृषकों को पहले वर्ष रूपये 10/- प्रति रोपित पौधा अनुदान दिया जाता है।



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