भू-प्रबंध प्रभाग का प्रमुख कार्य गैर वानिकी कार्यो के लिए वन भूमि व्यपवर्तन योजनाओं का क्रियान्वयन करना है। इस प्रभाग द्वारा वन संरक्षण अधिनियम, 1980 अंतर्गत भारत सरकार पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा विकास कार्यों हेतु वन भूमि प्रत्यावर्तन के छत्तीसगढ़ राज्य के अंतर्गत स्वीकृत प्रकरणों का सतत मूल्यांकन किया जाता है। प्रावधान अनुसार खनिज, सिंचाई, विद्युत, ओ. एफ. सी लाईन, रेल्वे लाईन, सड़क, स्कूल, अस्पताल, सेना एवं पुलिस विभाग के प्रशिक्षण केन्द्र निर्माण हेतु व्यपवर्तन प्रकरणों पर वन संरक्षण अधिनियम 1980 अंतर्गत कार्यवाही की जाती है।
असीमांकित संरक्षित वन को भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 4 (1) अंतर्गत आरक्षित वन घोषित करने हेतु अधिसूचना प्रस्ताव तैयार कर शासन को प्रेषित की जाती है। 1980 के पूर्व के वन मार्गो को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत उन्नयन/पक्की करने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाती है।
अनुसूचित जन जाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 अंतर्गत 3 पीढ़ियों से निवासरत काबिजों को वन अधिकार मान्यता पत्र वितरण से संबंधित कार्य संपादित किये जाते है। इसके अतिरिक्त -
छत्तीसगढ़ राज्य के दिनांक 24.10.1980 के पूर्व के कुल 70,520 हेक्टेयर वन भूमि के 61860 अतिक्रामकों के लंबित प्रस्तावों को तीन श्रेणीयों में बांटते हुए वन संरक्षण अधिनियम 1980 अस्तित्व में आने तक श्रेणी I एवं II के 51,853 अतिक्रामकों की 56,875 हेक्टेयर वन भूमि में सशर्त प्रथम चरण स्वीकृति जारी की गई है। भारत सरकार द्वारा श्रेणी III के 10,007 अतिक्रामकों की 13645 हेक्टेयर वन भूमि के प्रकरण को अस्वीकृत किया गया है।
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श्रेणी |
विवरण |
अतिक्रामक संख्या |
क्षेत्रफल |
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I |
दिनांक 31.12.1976 तक के राजस्व एवं वनग्रामों के अतिक्रामक |
17746 |
19270 |
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II |
दिनांक 01.01.1977 से 06.03.1979 तक के वन भूमि के अतिक्रामक |
34107 |
37605 |
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योग |
51,853 |
56875 |
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III |
दिनांक 07.03.1979 से 24.10.1980 तक के वनभूमि के
अतिक्रामक |
10,007 |
13645 |
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महायोग I + II + III |
61860 |
70520 |
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क्र. |
अधिरोपित शर्त |
अधिरोपित शर्तो का पालन |
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1 |
भारत सरकार द्वारा अधिरोपित शर्तो के अनुपालन में राज्य सरकार द्वारा दिनांक 31.12.1976 के पूर्व के 39883 अतिक्रामकों को 40,851.420 हेक्टेयर क्षेत्रा में पट्टा वितरित किया जा
चुका है। श्रेणी I + II के कुल 56875 हेक्टेयर इस प्रकार कुल 97766.381 हेक्टेयर क्षेत्र
में वैकल्पिक वृक्षारोपण किया जाना था। |
उक्त शर्तो के पालन
में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 97766.381 हेक्टेयर से भी अधिक कुल 97,774 हेक्टेयर क्षेत्रा
में वैकल्पिक वृक्षारोपण कार्य पूर्ण करा
लिया गया। प्रकरण अंतिम
स्वीकृति प्राप्त करने हेतु भारत सरकार, नई दिल्ली के पास लंबित है। |
इस अधिनियम के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ राज्य का राष्ट्र में प्रथम स्थान है। ऐसे क्षेत्रों में विकास कार्यो को शीघ्रता से प्रारंभ करने के भी प्रयास किये जा रहे हैं (प्रदर्श-ब)।विवरण के लिए क्लिक करें
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क्रमांक |
वृत्त का नाम |
वितरित मान्यता पत्र |
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व्यक्तियों की संख्या |
क्षेत्रफल (हे.) |
||
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1 |
दुर्ग |
7047 |
8214.217 |
|
2 |
जगदलपुर |
13992 |
17065.206 |
|
3 |
कांकेर |
24095 |
32423.913 |
|
4 |
सरगुजा |
24105 |
19331.414 |
|
5 |
बिलासपुर |
16033 |
12710.455 |
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6 |
रायपुर |
18810 |
25067.002 |
|
योग |
1,04,082 |
114812.207 |
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वन संरक्षण अधिनियम 1980 अंतर्गत भारत सरकार पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने वन क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों हेतु वन भूमि प्रत्यावर्तन के छत्तीसगढ़ राज्य के अंतर्गत स्वीकृत प्रकरणों का विवरण निम्नानुसार है :-
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स्तर |
सिंचाई |
विद्युत |
खनिज |
विविध |
पूर्वेक्षण |
कुल |
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नई दिल्ली |
2 |
3 |
7 |
4 |
0 |
16 |
|
क्षेत्रीय कार्यालय |
1 |
5 |
3 |
9 |
0 |
18 |
|
राज्य शासन |
0 |
1 |
1 |
5 |
0 |
7 |
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आवेदक संस्थान |
66 |
61 |
71 |
102 |
25 |
325 |
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योग |
69 |
70 |
82 |
120 |
25 |
366 |
राज्य कैम्पा ए.पी.ओ. 2009-10 एवं 2011 अन्तर्गत किये जाने वाले वैकल्पिक वृक्षारोपण कार्यो बाबत प्रस्तुत 52 कालम की जानकारी (प्रदर्श-'ई') ।
छत्तीसगढ़ राज्य के कुल 425 वनग्रामों में से 420 वनग्रामों (5 वनग्राम विरान ) को राजस्व ग्रामों में परिवर्तन हेतु राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव दिनांक 10.04.2002 एवं दिनांक 14.04.2002 को भारत शासन को प्रेषित किये गये है। इस संबंध में भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा धमतरी, रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कवर्धा, कांकेर, दंतेवाडा, बस्तर एवं कोरिया जिलों का स्थल निरीक्षण का कार्य भी किया जा चुका है भारत शासन, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने लेख किया है, कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फरवरी, 2004 के निर्णय के अनुसार कोई भी वन भूमि निर्वनीकृत नही की जावेगी। अतः वनभूमि का वैधानिक स्थिति व्यपवर्तन के बाद भी वन भूमि ही रहेगी। उक्त निर्णय के अनुसार भारत शासन ने वनग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने का प्रकरण बंद कर दिया है तथा राज्य शासन को यह सलाह दी है कि यदि राज्य शासन चाहे तो माननीय सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर सकता है। तद्नुसार रिट याचिका क्रमांक 337/95 में एक अभ्यावेदन माननीय सर्वोच्च न्यायालय में राज्य की ओर से दिनांक 02.04.2005 को प्रस्तुत किया गया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रकरण परीक्षण हेतु केन्द्रीय सशक्त समिति को भेजा गया। केन्द्रीय सशक्त समिति द्वारा तथ्यों का परीक्षण करने के उपरांत अपनी अनुशंसा माननीय सर्वोच्च न्यायालय को प्रस्तुत की गई ।
केन्द्रीय सशक्त समिति (CEC) के उपरोक्त अनुशंसा पश्चात उपरोक्त प्रकरण में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दिनांक 26.05.2006 को Rejoinder दाखिल किया गया ।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उपरोक्त याचिका पर सुनवाई करते हुए दिनांक 28.11.2007 को विस्तृत निर्देश जारी किये गये तथा निर्देशों पर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गये। प्रकरण माननीय सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।
वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तन करने हेतु माननीय मुखयमंत्री जी, छत्तीसगढ़ द्वारा माननीय मंत्री जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली को प्रस्ताव भेजा गया है।
विवरण के लिए क्लिक करेंछत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पूर्व म0प्र0 शासन वन विभाग के पत्र क्रंमाक एफ 5/43/90/10-3/96 दिनांक 14/05/1996 के अनुसार ही छत्तीसगढ़ राज्य में 14 नारंगी क्षेत्र की सर्वेक्षण एवं सीमांकन इकाईयों द्वारा प्रथम चरण में कुल 1298225.095 हे. नांरगी क्षेत्र का प्रांरभिक सर्वेक्षण कर 803328.296 हे. नांरगी क्षेत्र वन प्रबंधन के अनुपयुक्त एवं 494896.799 हे. क्षेत्र आरक्षित वन बनाने हेतु उपयुक्त पाया गया। आज दिनांक तक 4.88 लाख हे. उपयुक्त पाये गये नारंगी क्षेत्र में से 2.50 लाख हे. नारंगी क्षेत्र की धारा 4 के अंतर्गत अधिसूचना प्रस्ताव प्रकाशन हेतु शासन को भेजे गए थे, जिसे राज्य शासन के पत्र क्रमांक/5-25/ 05/10-2 दिनांक 02.09.2010 अधिसूचना हेतु प्रस्तावित क्षेत्र में वन अधिकार मान्यता पत्र वितरण किये गये क्षेत्र को अलग रंग से चिन्हांकित कर संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत करने हेतु लेख किया गया है जिसके तारतम्य में कार्यालयीन पत्र क्रमांक/ भू-प्रबंध/ नारंगी/ 421-2/ 1763 दिनांक 11.10.2010 के द्वारा समस्त इकाई प्रभारियों को वापस किया जा चुका है जिसमें से कुछ इकाईयों से 80302.829 हे. का संशोधित प्रस्ताव पुनः शासन को भेजा जा चुका है। (प्रदर्श-'क')।