Protection


वन सुरक्षा


वनों की सुरक्षा विभाग का प्राथमिक दायित्व है, विभाग द्वारा वनों की सुरक्षा के लिए सत्‌त प्रयास किये जा रहे है। विभाग की अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, संरक्षण से जुडे अमले की क्षमता विकास, अग्नि सुरक्षा को सुदृढ़ करना, स्थानीय ग्रामीणों को वन सुरक्षा के कार्यो से जोड़े जाने जैसे कार्यो को प्राथमिकता दी गई है। विभाग की नियामक प्रणाली को मजबूत करने के साथ ही साथ संयुक्त वन प्रबंधन की रणनीति के तहत ग्रामीणों की सहभागिता प्राप्त करने के भी सफल प्रयास किये गये। प्रदेश में 7887 संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को वन सुरक्षा हेतु सहभागी बनाया गया है।


अवैध वन कटाई एवं अवैध शिकार के रोकथाम हेतु जांच व्यवस्था


वन क्षेत्रों में वनोपज की अवैध कटाई व निकासी को नियंत्रिात करने एवं अन्य वन अपराधों की रोकथाम के लिए राज्य के अन्दर वनों को बीटों में बॉटा गया है, हर बीट में सत्‌त निगरानी व सुरक्षा हेतु एक बीट गार्ड पदस्थ है। वनों की सुरक्षा के लिए वन मंडल स्तर पर बीट निरीक्षण रोस्टर बनाये गये है। जिसमें सहायक परिक्षेत्राधिकारी से लेकर वनमंडलाधिकारी तक को प्रतिमाह बीट निरीक्षण का लक्ष्य दिया गया है। बीट निरीक्षण में पायी जाने वाली अवैध कटाई एवं अन्य वन अपराध प्रकरणों का संज्ञान वरिष्ठ अधिकारी द्वारा लेकर त्वरित कार्यवाही की जाती है। 

अवैध निकासी पर रोकथाम हेतु राज्य में कुल 330 एवं 35 अंतर्राज्यीय वनोपज जांच नाके स्थापित किये गये हैं। इन जांच नाकों पर वाहनों की सघन जांच की जाती है तथा वनोपज लदे वाहनों से संबंधित जानकारियों को अभिलेखित भी किया जाता है। बिना परिवहन अनुज्ञा पत्रा के वनोपज परिवहन करने वाले वाहनों के विरूद्व सुसंगत अधिनियमों के प्रावधानों के तहत कड़ी कार्यवाही की जाती है।




आरामशीनों की जानकारी


राज्य में कुल 1420 आरा मशीनें पंजीकृत है :-

अ.क्र.

वृत्त का नाम

आरा मशीनों की संख्‍या

1

रायपुर

519

2

दुर्ग

394

3

कांकेर

18

4

जगदलपुर

61

5

बिलासपुर

363

6

सरगुजा

65

योग

1420


माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आरामशीनों के संबंध में दिये गये अंतरिम निर्णय के प्रकाश में, राज्य में वर्ष 1997 के पश्चात्‌ किसी भी नई आरामशीन की अनुज्ञप्ति जारी नहीं की गई है। आरामशीनों का नियमित निरीक्षण किये जाने के लिए वन मंडल स्तर पर निरीक्षण रोस्टर बनाया जाता है तथा आरामशीनों पर निरंतर नियंत्राण रखा जाता है। आरामशीन में अनियमितता पाये जाने पर छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान अधिनियम 1984 एवं इसके अंतर्गत बनाये गये नियमों के तहत आरामशीन स्वामी के ऊपर वैधानिक कार्यवाही की जाती है।



अग्नि सुरक्षा


विभाग द्वारा वनों की अग्नि से सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रदेश में कुल 86730 कि.मी. फायर लाईन है। उक्त फायर लाईन को प्रतिवर्ष कटाई, जलाई कार्य कर रख-रखाव किया जाता है। वनों की अग्नि से सुरक्षा हेतु सभी 3265 बीटों में एक-एक अग्नि रक्षक संपूर्ण अग्नि काल (4 माह) के लिए तैनात किया जाता है।
वन प्रबंधन सूचना प्रणाली वनमण्डल, रायपुर (FMIS Division) द्वारा सेटेलाईट के माध्यम से वन अग्नि पर नियंत्रण एवं त्वरित कार्यवाही हेतु लगभग त्मंस ज्पउम चेतावनी प्रणाली संचालित की जाती है। जिसके माध्यम से क्षेत्रीय अमले को सेटेलाईट से प्राप्त जानकारी के आधार पर क्षेत्रा विशेष में अग्नि संभावना की सूचना मोबाईल SMS के माध्यम से भी दी जाती है एवं उसकी अनुश्रवण भी किया जाता है।



स्ट्राईक फोर्स का गठन


वनों की सुरक्षा को और मुस्तैद करने के लिए मुखयालय स्तर पर 01, वृत्त स्तर पर 06, वनमण्डल स्तर पर 32 एवं परिक्षेत्रा स्तर पर 164 स्ट्राईक फोर्स का गठन किया गया है। उक्त स्ट्राईक फोर्स के माध्यम से वन अपराध रोकने तथा अग्नि से बचाव का कार्य कराया जा रहा है।
केन्द्र प्रवर्तित गहन वन प्रबंधन योजना राज्य में वन सुरक्षा के लिए अधोसंरचना विकास हेतु भारत सरकार से अधिक से अधिक वित्तीय सहायता प्राप्त करने के प्रयास किये गये है। भारत सरकार, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के द्वारा वर्ष 2011-12 एवं 2012-13 में गहन वन प्रबंधन योजना के अंतर्गत विमुक्त राशि निम्नानुसार की गई है :-



केन्द्र प्रवर्तित गहन वन प्रबंधन योजना


राज्य में वन सुरक्षा के लिए अधोसंरचना विकास हेतु भारत सरकार से अधिक से अधिक वित्तीय सहायता प्राप्त करने के प्रयास किये गये है। भारत सरकार, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के द्वारा वर्ष 2011-12 एवं 2012-13 में गहन वन प्रबंधन योजना के अंतर्गत विमुक्त राशि निम्नानुसार की गई है :-

राशि लाखों में

वित्तीय वर्ष

 

स्वीकृत राशि

विमुक्त राशि

 

व्यय राशि

केन्द्रांश 75%

राज्यांश 25%

योग

1

2

3

4

5

6

2011-12

673.61

224.53

898.14

603.88

589.46

2012-13

624.14

208.05

832.19

530.71

85.90

(दिसम्बर 2012 तक)

उपरोक्त योजना के अंतर्गत वर्ष 2012-13 में 10800 कि.मी. लम्बी 6 मीटर चौड़ी फायर लाईन की रख-रखाव कार्य किया जाना है एवं वनों की अग्नि से रोकथाम के लिए 600 अग्नि सुरक्षा श्रमिक तैनात किया जाना है। संवेदनशील क्षेत्रों में 09 वनचौकियों का निर्माण एवं वनसीमा के चिन्हांकन हेतु 5000 मुनारों का निर्माण कार्य भी किया जाना है। उक्त समस्त कार्य प्रगति पर है।



वन आयोजनेत्तर मद से अग्नि सुरक्षा के कार्य


उक्त योजनांतर्गत 15 जून 2012 तक वनों की अग्नि सुरक्षा हेतु 2000 फायर वाचर तैनात किये गये थे। इस फायर सीजन में 12 मीटर चौड़ी के 13571 कि.मी. लम्बी सीमा लाईनों की रख-रखाव कार्य किया जाना है एवं वनों की अग्नि से रोकथाम के लिए 2000 अग्नि सुरक्षा श्रमिक तैनात किया जाना है। उक्त योजनांतर्गत वर्ष 2011-12 एवं 2012-13 में आबंटन एवं व्यय की जानकारी निम्नानुसार है :- 
राशि लाख में

वर्ष

आबंटन

व्यय

2011-12

560.00

581.55

2012-13

600.00

322.61

(दिसम्बर 2012 तक)


वनों की अग्नि से सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। वनों की अग्नि से सुरक्षा हेतु सभी 3265 बीटों में एक-एक अग्नि रक्षक संपूर्ण अग्नि काल (4 माह) के लिए तैनात किया जाता है। वनों की अग्नि सुरक्षा की सतत्‌ निरीक्षण व सहायता हेतु 24 वन मंडल स्तरीय स्ट्राईक फोर्स तथा 112 परिक्षेत्र स्तरीय स्ट्राईक फोर्स (हर वाहन में 5 सुरक्षा श्रमिकों की तैनाती के साथ) कार्यरत हैं।


Last Updated on : 19 September 2013 12:52:58 Copyright © 2013-14 Chhattisgarh Forest Department, All Rights Reserved. Site Powered by MIS CELL